मेरे अर्थ
मेरे भीतर छिपे अर्थ को व्यक्त करते शब्द
Monday, March 27, 2017
आठ छोटी बेचैन अकविताएं
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दिलों की लकड़ी शायद गीली हो चुकी धुआँ तो खूब ही करती है पर धधकती नहीं अब *** एक टुकड़ा बादल तलाशत...
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