मेरे अर्थ
मेरे भीतर छिपे अर्थ को व्यक्त करते शब्द
Thursday, March 27, 2025
ग़ैर-मौजूदगी
›
अब बस ढोता हूँ तुम्हारी ग़ैर-मौजूदगी को एक बोझे की मानिंद— बोझा जिसे किसी ने एक हुक में पिरोकर मेरी चमड़ी के ठीक नीचे टाँक दिया हो। सां...
4 comments:
‹
›
Home
View web version