मेरे अर्थ
मेरे भीतर छिपे अर्थ को व्यक्त करते शब्द
Monday, May 12, 2025
कोई मंज़िल न निशाँ है मुझ में (ग़ज़ल)
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कोई मंज़िल न निशाँ है मुझ में इक सफ़र ही तो बस रवाँ है मुझ में शोर बाहर का थमा तो समझ आया भीतर भी इक शहर है यहाँ मुझ में फिर आएगी बारि...
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