मेरे अर्थ
मेरे भीतर छिपे अर्थ को व्यक्त करते शब्द
Friday, June 20, 2025
अब रोज़ तमाशा मैं नया देख रहा हूँ
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अब रोज़ तमाशा मैं नया देख रहा हूँ हर शख़्स को हर शख़्स से ख़फ़ा देख रहा हूँ सूरज भी लगा आज उदासी से है निकला और शाम में भी दर्द नया देख रहा ह...
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