मेरे अर्थ
मेरे भीतर छिपे अर्थ को व्यक्त करते शब्द
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غزل
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Monday, May 12, 2025
कोई मंज़िल न निशाँ है मुझ में (ग़ज़ल)
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कोई मंज़िल न निशाँ है मुझ में इक सफ़र ही तो बस रवाँ है मुझ में शोर बाहर का थमा तो समझ आया भीतर भी इक शहर है यहाँ मुझ में फिर आएगी बारि...
Monday, December 16, 2024
पुराने मोड़ से रस्ते नए निकल जाते हैं
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पुराने मोड़ से रस्ते नए निकल जाते हैं नए तजुर्बों से पुराने हल निकल जाते हैं सच कहूँ तिरी बात से अब कोई गिला नहीं ये तो आँसू हैं, बस यूं ही न...
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Friday, January 26, 2024
यूं सफ़र-ए-हयात का अंजाम लिख दिया
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यूं सफ़र-ए-हयात का अंजाम लिख दिया हर ख़ुशी हर ग़म पे तेरा नाम लिख दिया ख़ुद को ख़त लिखते रहे तेरे नाम के आख़िरी अलविदा भी कल शाम लिख दिया रा...
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Wednesday, January 24, 2024
وں سفر حیات کا انجام لکھ دیا
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وں سفر حیات کا انجام لکھ دیا ہر خوشی ہر غم پہ تیرا نام لکھ دیا خود کو خط لکھتے رہے تیرے نام کے آخری الوداع بھی کل شام لکھ دیا رات بھ...
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